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ट्रंप से मुलाकात पर क्या बोले नेतन्याहू, मीटिंग से पहले क्यों भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति? गाजा-लेबनान से लेकर अब्राहम समझौतों तक हुई चर्चा

 Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 29, 2026 09:31 am IST,  Updated : Jul 29, 2026 09:40 am IST

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात हुई। इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप और उनके कैबिनेट सदस्यों से साफ कहा कि अगर ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो वे जवाब देंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति...- India TV Hindi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू Image Source : AP

Highlights

  • डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच डेढ़ घंटे तक मीटिंग चली।
  • बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि साझा लक्ष्य की समझ वाली बातचीत थी।
  • नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को बेहतरीन बताया। आपको बता दें कि ईरान के खिलाफ संयुक्त युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। इस मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों में आई हालिया खटास दूर करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। बंद दरवाजे के पीछे हुई यह बैठक लगभग डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच, ईरान के साथ युद्ध के अलावा गाजा, लेबनान और अब्राहम समझौते जैसे मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वहीं, जब दोनों नेताओं की मीटिंग चल रही थी, तब व्हाइट हाउस के बाहर नेतन्याहू के खिलाफ नारेबाजी भी देखी गई। 

बता दें कि यह बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों नेता अपने-अपने देशों में राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। नेतन्याहू आगामी चुनाव का सामना कर रहे हैं और ट्रंप के साथ बिगड़ते संबंधों को लेकर भी उनकी आलोचना हो रही है। वहीं, ट्रंप पर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले उस युद्ध को समाप्त करने का दबाव है, जिसने आर्थिक नुकसान पहुंचाया है और महंगाई बढ़ा दी है।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

व्हाइट हाउस बैठक की जानकारी रखने वाले एक इजरायली अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि नेतन्याहू ने ट्रंप और उनके कैबिनेट सदस्यों से साफ कहा कि अगर ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो वे जवाब देंगे, लेकिन इसके अलावा वे अगले कदमों के बारे में अमेरिका के राष्ट्रपति के फैसले पर भरोसा करेंगे।

बैठक के बाद नेतन्याहू ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि ट्रंप की पूरी वरिष्ठ टीम इस बैठक में मौजूद थी। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे। वेंस पहले इजरायल की आलोचना कर चुके हैं और जून में उन्होंने इजरायली अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि दुनिया के नेताओं में ट्रंप ही उनके एकमात्र दोस्त हैं।

बैठक के बाद नेतन्याहू ने क्या कहा?

बैठक के बाद नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में कहा, "जब मैं कहता हूं कि बैठक उत्कृष्ट थी, तो यह केवल औपचारिक बात नहीं है। यह पूरी साझेदारी, पारस्परिक समर्थन और इस साझा लक्ष्य की समझ वाली बातचीत थी कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके अलावा भी कई साझा लक्ष्य हैं।"

ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी साथ दिखे

बैठक के बाद नेतन्याहू, ट्रंप और जेडी वेंस अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान नेतन्याहू की मुलाकात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी हुई, जिन्होंने उसी दिन ट्रंप से अलग मुलाकात की थी।

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल हुए बेंजामिन नेतन्याहू
Image Source : APअमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल हुए बेंजामिन नेतन्याहू

बैठक से पहले ट्रंप की नाराजगी

मुलाकात से पहले ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ कुछ तनाव जाहिर किया। उन्होंने उन रिपोर्टों पर शिकायत की जिनमें कहा गया था कि इजरायली नेता 'पिकएक्स माउंटेन' पर ईरान की गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी पर चर्चा करने की योजना बना रहे थे। यह एक संभावित परमाणु साइट है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार बमबारी करने की धमकी दी है।

ट्रंप ने "फॉक्स एंड फ्रेंड्स" से कहा, "मुझे अच्छी तरह पता है कि पिकएक्स में क्या हो रहा है। ईरान जो कुछ भी कर रहा है वह "कोई बड़ी समस्या नहीं है" और "बिबी (नेतन्याहू) मुझे यह इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि वह चाहते हैं कि मैं इसमें शामिल रहूं।" ट्रंप ने अपने सहयोगी के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "आपको दुनिया को यह बताने की क्या जरूरत है?"

इजरायल ने क्या जवाब दिया?

इजरायली अधिकारी के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायल हमेशा अमेरिका के साथ अपनी खुफिया जानकारी साझा करता रहेगा। हालांकि, इजरायल यह भी समझता है कि अमेरिका की अपनी रणनीति, समयसीमा और क्षेत्रीय सहयोगियों से जुड़े अलग-अलग हित हैं, जिन्हें किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले ध्यान में रखना जरूरी है।

ट्रंप-नेतन्याहू रिश्तों में उतार-चढ़ाव

ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते वर्षों से कभी अच्छे तो कभी तनावपूर्ण रहे हैं। पिछले वर्ष ट्रंप की व्हाइट हाउस वापसी के बाद दोनों नेताओं की नजदीकियां बढ़ी थीं। फरवरी में जब दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया, तब दोनों ने एकजुट होकर दावा किया था कि उनका लक्ष्य ईरानी नेतृत्व को कमजोर करना और पश्चिम समर्थक सरकार के लिए रास्ता तैयार करना है। लेकिन बाद में ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। ड्रोन और मिसाइलों से अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र की ऊंची इमारतों को निशाना बनाया।। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ। इसके बाद, ट्रंप पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ गया।

ईरान पर आगे क्या होगा?

नेतन्याहू ईरान और उसके सहयोगी हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते थे, लेकिन ट्रंप अब तेहरान के साथ समझौते की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस मुद्दे पर ट्रंप, जेडी वेंस और नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। इजरायली पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अमित सेगल ने इजरायल हयोम में लिखा, "अमेरिका इजरायल को साफ संदेश दे रहा है कि युद्ध वही चला रहा है। अब सभी को स्पष्ट हो गया है कि इजरायल को पीछे की सीट पर बैठा दिया गया है।"

रविवार को नेतन्याहू ने भी स्वीकार किया, "कई मायनों में आगे क्या होगा, यह ट्रंप का फैसला है। यदि वे बिना बड़े सैन्य संघर्ष के यह कर सकते हैं, तो ठीक है। क्यों नहीं?" उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, "किसी भी स्थिति में ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म होना ही चाहिए।"

लेबनान और अब्राहम समझौते पर भी चर्चा

इजरायली अधिकारी के अनुसार, बैठक में अमेरिका और इजरायल के बीच लेबनान को लेकर हुए फ्रेमवर्क समझौते पर भी चर्चा हुई। साथ ही, अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) का दायरा बढ़ाने पर भी बातचीत हुई, जिसके तहत कई अरब और मुस्लिम बहुल देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए हैं।

दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना अब भी कई इलाकों में मौजूद है। इजरायल ने एक पायलट कार्यक्रम के तहत लेबनानी सेना को कुछ गांवों में तैनाती की अनुमति दी है, ताकि यह परखा जा सके कि क्या वह उन क्षेत्रों की सुरक्षा संभाल सकती है, जहां पहले हिज़्बुल्लाह सक्रिय था। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस कार्यक्रम के विस्तार पर अगली वार्ता अगले सप्ताह रोम में होगी।

गाजा में अंतरराष्ट्रीय बल की तैयारी

गाजा को लेकर इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने रविवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत अमेरिका समर्थित युद्धविराम समझौते में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल के पहले सदस्यों को सैद्धांतिक रूप से गाजा में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, बहुत कम देशों ने सैनिक भेजने की सहमति दी है। मोरक्को और युगांडा के सैनिकों का नाम सामने आया है। इन सैनिकों को दक्षिणी गाजा के राफा इलाके के सीमित क्षेत्र में ही काम करने की अनुमति मिलेगी। यहां विस्थापित फिलिस्तीनियों की पहचान और पुनर्वास की योजना बनाई गई है। हर तैनाती को इजरायल अलग-अलग मंजूरी देगा। इजरायली सेना का कहना है कि उसके हमले आतंकियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं, लेकिन इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की भी मौत हुई है।

व्हाइट हाउस के बाहर नेतन्याहू के खिलाफ हुई नारेबाजी
Image Source : APव्हाइट हाउस के बाहर नेतन्याहू के खिलाफ हुई नारेबाजी

अमेरिका में घटा इजरायल के लिए समर्थन!

गाजा युद्ध को लेकर अमेरिका में इजरायल के प्रति समर्थन लगातार घट रहा है। इस महीने जारी AP-NORC सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी नागरिकों के बीच इजरायल के लिए समर्थन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। बैठक के दौरान व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह ने नेतन्याहू के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा, "नेतन्याहू, तुम तानाशाह हो।" और "बीबी, तुम्हारा यहां स्वागत नहीं है।"

बैठक के कुछ घंटे बाद ईरान का हमला

वहीं, बैठक के कुछ ही समय बाद ईरान ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना के अनुसार, सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। (इनपुट- AP)

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